National

BCI चेयरमैन के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में वकीलों का प्रदर्शन

फर्जी लॉ कॉलेज और वकीलों की सुरक्षा पर उठे सवाल

नई दिल्ली। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में वकीलों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। ऑल इंडिया यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शन को कॉकरोच जनता पार्टी का भी समर्थन मिलने की बात कही गई है। प्रदर्शन को देखते हुए बीसीआई कार्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। विरोध के दौरान एनएएलएसएआर से जुड़े विवाद का मुद्दा भी सामने आया।

प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं ने बीसीआई नेतृत्व पर वकीलों और कानून के विद्यार्थियों से जुड़े कल्याणकारी मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। अधिवक्ता उमेश कुमार ने कहा कि देश में वकीलों पर हमलों और उनकी सुरक्षा से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन इन घटनाओं पर बीसीआई की ओर से अपेक्षित हस्तक्षेप नहीं किया गया।

उन्होंने हाल ही में हैदराबाद में एक वरिष्ठ अधिवक्ता की मौत का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि ऐसे मामलों में बीसीआई की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वकीलों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

स्टाइपेंड से लेकर सुरक्षा तक के मुद्दे उठाए

प्रदर्शनकारियों ने अधिवक्ताओं के लिए बेहतर कल्याण योजनाएं, एडवोकेट्स एक्ट में सुधार, युवा वकीलों के लिए स्टाइपेंड, चैंबर की सुविधा और अधिवक्ताओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे उठाए। इसके साथ ही देश में कानून कॉलेजों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और कथित फर्जी लॉ कॉलेजों एवं फर्जी डिग्रियों पर कार्रवाई की मांग भी की गई।

अधिवक्ता उमेश कुमार ने बीसीआई के आधिकारिक पत्रों के कथित दुरुपयोग का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि बार काउंसिल को वकीलों और कानून के छात्रों से जुड़े मूलभूत मुद्दों पर अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

फर्जी वकीलों के दावे पर भी उठे सवाल

प्रदर्शन के दौरान देश में कथित फर्जी वकीलों की संख्या को लेकर भी दावा किया गया। उमेश कुमार ने आरोप लगाया कि कानूनी पेशे में बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद हैं, जिनकी वैधता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने दावा किया कि करीब 35 से 40 प्रतिशत लोग फर्जी वकील हैं।

प्रदर्शनकारियों ने बीसीआई से वकीलों की सुरक्षा, युवा अधिवक्ताओं के हित और कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की मांग की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *